शीश गंग अर्धंग पार्वती
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कैलाशी शिवको आरती
भिडियो: T-Series Bhakti Sagar
शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी।
नंदी भृंगी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुर सुखरासी॥
शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह बैठे हैं शिव अविनाशी।
करत गान-गन्धर्व सप्त स्वर, राग रागिनी मधुरासी॥
यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत, बोलत हैं वनके वासी।
कोयल शब्द सुनावत सुन्दर, भ्रमर करत हैं गुंजा-सी॥
ऋद्धि-सिद्धि के दाता शंकर, नित सत् चित् आनन्दरासी।
जिनके सुमिरत ही कट जाती, कठिन काल यमकी फांसी॥
कैलासी काशी के वासी, अविनाशी मेरी सुध लीजो।
सेवक जान सदा चरनन को, अपनो जान कृपा कीजो॥
तुम तो प्रभुजी सदा दयामय, अवगुण मेरे सब ढकियो।
सब अपराध क्षमाकर शंकर, किंकर की विनती सुनियो॥
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